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Showing posts from August, 2017

अगर ईशान कोण दूषित हुआ तो बैंड बजा गया जिंदगी का........

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वास्तु का अर्थ हमारी भाषा में सिर्फ इतना ही है की वास्तव में ऊर्जा का प्रवाह सही दिशा में हो। खगोल विज्ञान के अनुसार ब्रह्माण्ड अग्नि,पृथ्वी,वायु,जल व् आकाश तत्व से निर्मित है।जिसको हम पांच तत्व कहते है जब वही पांच तत्व शरीर के अनुरूप हो तो व्यक्ति का मन,मष्तिष्क व् शरीर रोगग्रस्त हो सकता है व् व्यक्ति अनेकानेक कारणों के लिए कर्ज लेता है और सही समय पे न चुका कर अपना मान सम्मान सब खो देता और पतन के रास्ते पर आ जाता है। हम मुख्य दिशायों के दोष से देखें की व्यक्ति किस कार्य हेतु कर्ज लेगा और समय पर चुका नही पायेगा। घर से सुख शांति सब चली जायेगी। इशानकोण है वो कोना घर का इशान कोण के देवता स्वामी ग्रह बृहस्पति को माना जाता है| गुरु ज्ञान,कोष विद्या एवं परिवार का कारक कहा जाता है| यदि ईशान कोण में कही दोष आ जाये तो उपरोक्त कारकों में कमी होगी, व्यक्ति आर्थिक सम्पन्नता आभाव से पीड़ित होगा। व्यवसाय में लगातार कार्य करने के उपरांत भी वांछित परिणाम प्राप्त नहीं होगा,इन कारकों की पूर्ति हेतु व्यक्ति कर्ज लेता है। यदि हमध्यान से देखें तो इस दोष के कारणवश व्यक्ति कन्या के विवाह के लिए,धार्मि...

वास्तु दोषों की समस्या भाग कर शादी करती है लड़कियां विश्लेषण.....

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 ये स्थिति तब पैदा होती है जब वायव्य कोण में निर्मित पानी की टंकी, बोरिंग, सैप्टिक टैंक या कुआं अथवा किसी प्रकार से नीचा होने पर बेटी घर में कम बाहर अधिक रहती है। प्रायः देखा गया है कि ऐसी स्थिति में रहने वाली लड़कियां अपनी मर्जी से घर से भागकर शादी कर लेती हैं। अगर घर का वास्तु ठीक नहीं है, तो किशोरावस्था में लड़के-लड़कियों के कदम बहक सकते हैं। वर्तमान सहशिक्षा एवं जीवन शैली के आधुनिक पर्यावरण में वे कच्ची उम्र में ही प्यार-मोहब्बत के चक्कर में पड़कर अपना जीवन तबाह कर लेते हैं। यदि आपके घर में बेटी के साथ ऐसी कोई समस्या है,तो उसकी कुंडली किसी उचित ज्योतिष से विश्लेषण करवा कर उचित उपाय करे। बेटी को फटकारने के बजाय घर के वास्तु दोषों पर ध्यान दीजिए। उन वास्तु दोषों को दूर करने के उपाय कीजिए। समस्या स्वतः ही समाप्त हो जाएगी। यदि कन्या बालिग नहीं है, तो उसे वायव्य दिशा शयनकक्ष में नहीं सुलाना चाहिए। वस्तुतः वायव्य कोण में उच्चाटन की प्रवृति होती है। इसका उद्देश्य वायव्य कोण में सोने वाले जातक को घर से बाहर भेजना होता है। कम उम्र की कन्या जिसकी अभी शादी होली है, वायव्य दिशा के बेडरूम...

घड़ी.................

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जानिए वास्तु और घडी का सम्बन्ध हमारे जीवन में बहुत ही अहम होती है घड़ी। घड़ी आपके बुरे समय को अच्छे समय में बदल सकती है यदि आप वास्तु में बताए गए इन उपायों को मानते हैं तो। कहते हैं ना यदि समय ठीक है तो सब कुछ ठीक है। आपने अक्सर लोगों को आपने ये कहते हुए सुना होगा कि ” यार , मेरा टाइम ही ख़राब चल रहा है “. या फिर किसी को ये कहते जरुर सुना होगा कि ” मेरा समय ठीक नहीं चल रहा “. ज्योतिष और वास्तु की बात करें, तो ये अद्वितीय शास्त्र हमें ये ज्ञान देते हैं कि चाहे कैसी भी विपरीत परिस्थितियाँ क्यूँ ना हों, ज्योतिष और वास्तु की सहायता से इन दोषों को कम किया जा सकता है और अपने विपरीत परिस्थितयों को अपने अनुकूल बनाया जा सकता है . प्रिय पाठकों, हमारे घर की प्रत्येक वस्तु का हमारे जीवन में महत्व होता है, इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण वस्तु है घड़ी। हम घर में हो या बाहर समय देखने के लिये घड़ी का प्रयोग करते हैं। वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार घड़ी जहां हमें समय की सही जानकारी देती है वहीं इससे वास्तु के अनुसार हमारे परिवार के सदस्यों पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव पड़ता है। घड़ी भी वा...

इशान कोण लुप्त अनावश्यक कर्ज ......

इशान कोण के देवता स्वामी ग्रह बृहस्पति को माना जाता है| गुरु ज्ञान,कोष विद्या एवं परिवार का कारक कहा जाता है| यदि ईशान कोण में कही दोष आ जाये तो उपरोक्त कारकों में कमी होगी, व्यक्ति आर्थिक सम्पन्नता आभाव से पीड़ित होगा। व्यवसाय में लगातार कार्य करने के उपरांत भी वांछित परिणाम प्राप्त नहीं होगा,इन कारकों की पूर्ति हेतु व्यक्ति कर्ज लेता है। यदि हमध्यान से देखें तो इस दोष के कारणवश व्यक्ति कन्या के विवाह के लिए,धार्मिक अनुष्ठान हेतु,शिक्षा के लिए,भाई बहनों के कारणवश,व्यवसाय में उन्नति के कारण या आपूर्ति हेतु अथवा कई बार सामाजिक दिखावे के कारण कर्ज लेता है।  इस कोण के दोष से वंश वृद्धि नहीं होती।संतान कहने में नहीं होती,पत्नी रोगिणी होती है या अनावश्यक कलह होती है। यदि इशान कोण में टॉयलेट है तोह व्यक्ति कलह वंश या संतान के लिए कर्ज लेता है। इशान कोण में रसोई हो तो व्यक्ति के अनावश्यक व्यय होतें हैं,बरकत नहीं होती हैं,इसकी आपूर्ति हेतु कर्ज लेता है। यदि इशान कोण में गंदगी है तो व्यक्ति अन्य स्त्रियों के कारण कर्ज लेता है ।और अपना मान सम्मान सब खो देता है समाज मे हीन भावना से देखा ...

वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व

वास्तुशास्त्र में पश्चिम दिशा पश्चिम दिशा का स्वामी वरूण देव हैं.भवन बनाते समय इस दिशा को रिक्त नहीं रखना चाहिए.इस दिशा में भारी निर्माण शुभ होता है.इस दिशा में वास्तुदोष होने पर गृहस्थ जीवन में सुख की कमी आती है.पति पत्नी के बीच मधुर सम्बन्ध का अभाव रहता है.कारोबार में साझेदारों से मनमुटाव रहता है.यह दिशा वास्तुशास्त्र की दृष्टि से शुभ होने पर मान सम्मान, प्रतिष्ठा, सुख और समृद्धि कारक होता है.पारिवारिक जीवन मधुर रहता है. वास्तुशास्त्र में वायव्य दिशा वायव्य दिशा उत्तर पश्चिम के मध्य को कहा जाता है.वायु देव इस दिशा के स्वामी हैं.वास्तु की दृष्टि से यह दिशा दोष मुक्त होने पर व्यक्ति के सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आती है.लोगों से सहयोग एवं प्रेम और आदर सम्मान प्राप्त होता है.इसके विपरीत वास्तु दोष होने पर मान सम्मान में कमी आती है.लोगो से अच्छे सम्बन्ध नहीं रहते और अदालती मामलों में भी उलझना पड़ता है. वास्तुशास्त्र में उत्तर दिशा वास्तुशास्त्र में पूर्व दिशा के समान उत्तर दिशा को रिक्त और भार रहित रखना शुभ माना जाता है.इस दिशा के स्वामी कुबेर हैं जो देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं.यह द...

वास्तु शास्त्र में दिशाओं का प्रकृति का संबंध दिशाओं के साथ है।

वास्तु शास्त्र में दिशाओं का अत्यंत महत्व है क्योंकि प्रकृति का संबंध दिशाओं के साथ है। प्रकृति के विरुद्ध चलने पर तरह-तरह के कष्टों को झेलना पड़ता है, अत: दिशाओं के संबंध में ज्ञान होना अति आवश्यक है क्योंकि समस्याओं को तो मकान में रहने वाला ही झेलता है। यदि उसे दिशाओं के महत्व का ज्ञान होगा, तब वह बहुत आसानी से अपनी समस्याओं का समाधान कर सकता है। पूर्व दिशा यह दिशा अग्रि तत्व को प्रभावित करती है। यह सूर्योदय की दिशा है। यह पितृ स्थान की सूचक है। इस दिशा को बंद कर देने से सर्वप्रथम तो सूर्य की किरणों का गृह में प्रवेश रुक जाता है और तरह-तरह की व्याधियां उत्पन्न हो जाती हैं। मान-सम्मान की हानि होती है। कर्ज का बोझ बढ़ता है तथा पितृदोष लगता है। अर्थात मृत गणों का जातक को प्राय: आशीर्वाद नहीं मिलता। घर में मांगलिक कार्यों में बाधाएं या रुकावटें उत्पन्न होती हैं। प्राय: गृह निर्माण के पांच-छ: वर्ष के बीच में घर के मुखिया का देहांत हो जाता है। पश्चिम दिशा यह दिशा वायु तत्व की सूचक है। इसका देवता वायु चंचलता का सूचक है। यदि घर का दरवाजा पश्चिमाभिमुखी है तो इसमें रहने वाले का मन सर्वदा...

तिजोरी को रखने का तरीका घर में

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                                                                 घर में धन रखने का ये सुपर तरीका, दिनोंदिन बढ़ती है दौलत प्राचीन काल से ही घर में धन, ज्वेलरी और मूल्यवान वस्तुएं सहजने के लिए तिजोरी का र्निमाण किया जाता था और आज भी किया जाता है। बदलते परिवेश के साथ अब तिजोरी या लॉकर बनवाएं तो इसे रखने के लिए उपयुक्त स्थान का चयन करना भी आवश्यक है। इस संबंध में वास्तु शास्त्र को अपनाने से घर में बरकत के साथ-साथ धन की कमी नहीं होती। बहुत सारे रईस लोग अपनाते हैं  तिजोरी में सदैव धन की देवी महालक्ष्मी का वास रहे इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें। तिजोरी के दरवाजे पर महालक्ष्मी का सुंदर स्वरूप लगाएं।  मां का रुप बैठा हुआ हो साथ में दो हाथी सूंड उठाए नजर आएं। ऐसा फोटो लगाने पर आपकी तिजोरी हमेशा भरी रहेगी और पैसों की कमी कभी नहीं होगी। जहां तिजोरी को स्थापित करें उस कमरे को हल्के क्रीम रंग से रंगवाएं। देवालय में ति...

नैऋत्य कोण "NORTH-EAST"

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                                           आज हम बात करते है नैऋत्य कोण के बारे में।पीने का पानी कभी भी नैऋत्य कोण में नही रखना चाहिए इससे जल स्वादहीन हो जाता है।जल का कारक चन्द्रमा मन जाता है।नैऋत्य कोण का स्वामी राहु होता है।राहु के स्थान में चन्द्रमा होने से चंद्रमा दूषित हो जाता है ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण की स्थिति बताई जाती है चन्द्रमा और राहु की युक्ति को।अगर आपका किचन नैऋत्य कोण में है तो उस रसोई में बनाने वाले पदार्थ या खाने में मधुरता का आभाव होगा।उस रसोई में बने खाने को खाके परिवार में रहने वालो का स्वस्थ्य ठीक नही रहेगा।गृहणी हमेसा गुस्से में रहेंगे। आपसी मतभेद हमेशा रहेगा।गृहणियों की मानसिक स्थिति ठीक नही रहेगी।पश्चिम और नैऋत्य दिशाओं से आने वाली किरणों से भोजन की मधुरता खत्म हो जायेगी। नैऋत्य कोण में अगर सेफ्टी टैंक हो तो अवश्य वहां नकरात्मक ऊर्जा रहेगी जिससे परिवार की सुख शांति धन ऐश्वर्य सब खत्म हो जायेगा।गृहस्वामी जितना धन भी अर्जित करेंगे सब व्यथ होता जायेगा...

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई का सामान.......

अकसर हमने हमारे साथ के लोगों को ये बात करते सुना होता है कि हम कमाते बहुत हैं पर अच्छा गुजारा फिर भी नही होता घर मे आने वाले खाद्य पदार्थों में इन सामानों का रखे ध्यान वरना आ सकती है कंगाली अक्सर हम बाज़ार से खाने के कई सारे समान खरीद कर ले आते हैं लेकिन उन्हें सहेज कर रखने की जरूरत नहीं समझते। आपको बता दे की ऐसा करने से या तो वह खाने-पीने की चीजें खराब हो जाती है या किसी कारण से बेकार यूं ही पड़ी रहती हैं। शास्त्रों के अनुसार ऐसा करगया ना की ऐसा करने से आपको एक भारी नुकसान में डाल सकता है।  जी हां अन्न की किसी भी सामग्री को ऐसे ही कहीं भी रख देने से अन्पूर्णा देवी का अपमान होता है। आपको बता दे की शास्त्रों के अनुसार जिस घर में खाद्य पदार्थों को बेकार करके फेंक दिया जाता है वहां धीरे-धीरे अन्न का भंडार खत्म होने लगता है। इसी वजह से एक समय ऐसा भी आ सकता है जब आपके घर में खाने के लिए अन्न का एक एक कण भी नहीं बचेगा। इसलिए आपको बता दे अगर आप भी चाहते है की आपसे कोई भी देवी आपसे नाराज ना हो तो इसके लिए खास बताया गया है की घर में खाने का सामान हमेशा उत्तर-पश्चिम दिशा में ही रखें। बता...